हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में वर्ष 2017-18 के लिए हरियाणा आबकारी नीति के प्रावधानों में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई है।

चंडीगढ़, 13 सितंबर- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में वर्ष 2017-18 के लिए हरियाणा आबकारी नीति के प्रावधानों में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई है। 
संशोधन के अनुसार लाइसेंसधारक जिसने अपने सभी स्वीकृत ठेके या उप-ठेके स्थापित नहीं किए हैं, उसे अतिरिक्त फीस की अदायगी करने पर नगरपालिका क्षेत्र में राष्टï्रीय राजमार्ग या राज्यीय राजमार्गों के पास स्थित स्थलों पर ठेके या उप-ठेके स्थापित करने की अनुमति दी जाएगी। नए प्रतिष्ठïानों की संख्या आबकारी नीति में निर्धारित अधिकतम सीमा के अनुसार होगी।
शराब का प्रत्येक ठेका या उप-ठेका स्थानांतरित या स्थापित करने के लिए अतिरिक्त लाइसेंस फीस शेष अवधि के लिए जोन में एक ठेके की लाइसेंस फीस के औसत  30 प्रतिशत के बराबर निर्धारित की गई है। अत: अतिरिक्त लाइसेंस फीस की मात्रा जोन के लाइसेंस फीस के अनुपात में होगी। बारस, पबस, क्लबस और बैंक्टिवटस के लाइसेंस के लिए एल-2, एल-14ए को छोडक़र, अतिरिक्त लाइसेंस फीस की अदायगी के बिना पालिका क्षेत्र में राष्टï्रीय या राज्यीय राजमार्गों के पास कम्पोजिट ठेके या अपने उप-ठेके स्थापित करने या अपने लाइसेंसों के नवीनीकरण की अनुमति दी जाएगी।
संभावना है कि राज्य को लाइसेंस फीस, ड्यूटी और वैट से 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त, राष्टï्रीय और राज्यीय राजमार्गों के पास शराब ठेकों को स्थानांतरित किए जाने से 25 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की भी संभावना है।
नीति में यह परिवर्तन जुलाई, 2017 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शहरी क्षेत्रों में राजमार्गों के पास बार और शराब की दुकानें स्थापित करने पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाए जाने के संबंध में जारी आदेशों का अनुसरण करते हुए किया गया है। यह स्पष्टï किया गया है कि ठेकों या उप-ठेकों की संख्या  को मार्च 2017 की आबकारी नीति में पहले ही अनुज्ञेय संख्या से अधिक नहीं बढ़ाया जाएगा। 
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 हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त प्राचार्यों, सहायक प्राध्यापकों और सह-प्राध्यापकों को प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में पुन: नियुक्ति देने के उच्चतर शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। पुन: नियुक्ति 60 वर्ष की आयु तक दी जाएगी।

चंडीगढ़, 13 सितम्बर-मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त प्राचार्यों, सहायक प्राध्यापकों और सह-प्राध्यापकों को प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में पुन: नियुक्ति देने के उच्चतर शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। पुन: नियुक्ति 60 वर्ष की आयु तक दी जाएगी। 
पुन: नियुक्ति की प्रक्रिया के अनुसार सेवानिवृत्त प्राचार्यों, सहायक प्राध्यापकों और सह-प्राध्यापकों की आयु विज्ञापन की तिथि को साढ़े उनसठ वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उनकी अन्तिम 10 वर्षों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में से 80 प्रतिशत बहुत अच्छी या इससे ऊपर होनी चाहिए। उन्हें उनके सेवाकाल के दौरान किसी विभागीय कार्यवाही में दोषी करार न दिया गया हो और दण्डित न किया गया हो और उनके खिलाफ इस तरह की कोई कार्यवाही लम्बित न हो। इसके अलावा, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा न चल रहा हो तथा किसी न्यायालय द्वारा सजा न दी गई हो। ऐसे सेवानिवृत्त प्राचार्यों, सहायक प्राध्यापकों और सह-प्राध्यापकों को वरीयता दी जाएगी, जिन्होंने अपनी सक्रिय सेवा के दौरान कोई राष्टï्रीय या राज्य स्तर का पुरस्कार प्राप्त किया है। उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी से चिकित्सा उपयुक्तता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा। 
मुख्यालय द्वारा उन्हीं सेवानिवृत्त प्राचार्यों, सहायक प्राध्यापकों और सह-प्राध्यापकों से आवेदन मांगे जाएंगे जो इन शर्तों को पूरा करेंगे और आवेदन उन्हीं महाविद्यालयों के लिए मांगे जाएंगे, जहां आवश्यकता होगी।  
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हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेशभर में नए जमाने के आविष्कारकों और उद्यमशील प्रतिभाओं की सहायता करके राज्य को देश के संसाधनयुक्त और अभिनव स्टार्ट-अप केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए स्टार्टअप पॉलिसी को स्वीकृति प्रदान की गई।

चंडीगढ़, 13 सितंबर- मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेशभर में नए जमाने के आविष्कारकों और उद्यमशील प्रतिभाओं की सहायता करके राज्य को देश के संसाधनयुक्त और अभिनव स्टार्ट-अप केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए स्टार्टअप पॉलिसी को स्वीकृति प्रदान की गई।
इस नीति का उद्देश्य नीति अवधि के दौरान हरियाणा में ऊष्मायन और स्टार्ट-अप इको-सिस्टम में 1500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना, न्यूनतम 200 करोड़ रुपये के उद्यम पूंजीगत धन को सुसाध्य बनाना और कम से कम 500 स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित करना,सुसाध्य बनाना और इनका ऊष्मायन करना है। 
यह राज्य में नवाचार, अनुसंधान एवं विकास और इंजीनियरिंग का एक स्थायी पारिस्थितिक तंत्र बनाकर, हरियाणा को केंद्र सरकार की  प्रमुख पहल ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ के साथ जोडक़र,उद्योग-शिक्षा जगत का सहयोग बढ़ाकर तथा विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और कारोबारी समुदाय को जोडक़र तथा रीजन में अवसरों के अनूठे क्षेत्रों के अनुरूप व्यवसायों को बढ़ावा देकर किया जाएगा।
        इस प्रयोजन के लिए, गुरुग्राम में एक स्टार्ट-अप हब स्थापित करने और क्षेत्र की संसाधन शक्ति के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों को कवर करते हुए कम से कम 22 प्रौद्योगिकी, बिजनेस इन्क्यूबेटर या एक्सिलरेटर (प्रत्येक जिले में एक) स्थापित करने का प्रस्ताव है। प्रदेशभर में दस लाख वर्ग फुट का ऊष्मायन स्थल विकसित करने का प्रस्ताव है।
        इस नीति के उद्देश्य के लिए, केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिभाषा को अपनाया गया है, जो स्टार्टअप को ‘भारत में एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी (कंपनी अधिनियम, 2013 में परिभाषित) या भागीदार फर्म (भागीदारी अधिनियम, 1932 की धारा 59 के तहत पंजीकृत) या सीमित देयता भागीदारी (सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 के  तहत) के रूप में परिभाषित करता है; जोकि सात साल से पहले की न हो और जैव प्रौद्योगिकी कंपनियों के मामले में यह अवधि 10 साल तक होगी; जिसका किसी भी पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में सालाना कारोबार 25 करोड़ रुपये से अधिक न हो; और उत्पादों या प्रक्रियाओं या सेवाओं के नवाचार,  विकास या सुधार या रोजगार पैदा करने या धन सृजन की उच्च क्षमता वाले एक स्केलेबल व्यवसाय मॉडल के लिए कार्यरत हो।’
       इस मसौदा नीति के तहत इस तरह की संस्था के और लाभ बंद हो जाएंगे, यदि इसका पिछले वित्तीय वर्षों का कारोबार 25 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है या इसने निगमन या पंजीकरण की तिथि से सात वर्ष पूरे कर लिए हो। पात्र होने के लिए, कंपनी या संस्था हरियाणा दुकानें और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1958 के तहत हरियाणा में पंजीकृत होनी चाहिए और इसके कुल योग्य कर्मचारियों में से कम से कम 50 प्रतिशत हरियाणा में नियुक्त होने चाहिए। 
नीति कार्यान्वयन समिति द्वारा प्राप्त संभावित प्रारंभिक स्टार्ट-अप के सभी आवेदनों की प्रारम्भिक जांच  प्रधान सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा की जाएगी। प्रारंभिक जांच के बाद, छंटनी किए गए आवेदनों की सूची विषय से संबंधित इन्क्यूबेटरों को भेजी जाएगी। इन्क्यूबेशन प्रक्रिया के बाद इनक्यूबेटर्स एक प्रस्ताव तैयार करेंगे और इनक्यूबेटर्स की सिफारिशों या प्रस्तावों की सूची नीति कार्यान्वयन कमेटी के समक्ष रखी जाएगी, जोकि इन सिफारिशों पर विचार करेगी और मान्यता प्रमाण पत्र जारी करेगी। इस प्रमाणीकरण के बाद ही स्टार्ट-अप इस पॉलिसी के तहत प्रोत्साहन के लिए पात्र होंगे।  हितधारकों के साथ एक व्यापक परामर्श के बाद, इस नीति को पांच महत्वपूर्ण स्तंभों-बुनियादी ढांचे की वृद्धि, वित्तीय सहायता, कोष का सृजन, विनियामक सहायता और छात्र उद्यमिता पर बनाया गया है। 
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 मंत्रिमंडल की बैठक में सफाई कर्मचारियों की शिकायतों एवं कष्टïों के निवारण के लिए हरियाणा राज्य सफाई कर्मचारी आयोग गठित करने का निर्णय लिया गया।

चंडीगढ़, 13 सितंबर- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सफाई कर्मचारियों की शिकायतों एवं कष्टïों के निवारण के लिए हरियाणा राज्य सफाई कर्मचारी आयोग गठित करने का निर्णय लिया गया।

भारत सरकार ने वर्ष 1993 में राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का गठन किया था केन्द्र सरकार द्वारा पहले ही ‘मेहतर (मैनुअल स्केवेन्जर) के रूप में रोजगार निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम 2013’ नामक एक अधिनियम बनाया गया है।
आयोग के मुख्य कार्यों में भारत के संविधान के तहत या किसी भी अन्य कानून के तहत सफाई कर्मचारियों के लिए किए गए सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच और निगरानी करना और इस तरह के सुरक्षा उपायों का मूल्यांकन करना शामिल है। आयोग सफाई कर्मचारियों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेने और परामर्श देने तथा उनके विकास की गति का मूल्यांकन करने के अलावा सफाई कर्मचारियों को प्रभावित करने वाली विधायी एवं विकास नीतियों बारे सरकार को परामर्श  भी देगा। 
इसके अतिरिक्त, आयोग सफाई कर्मचारियों से संबंधित कानूनों और कल्याण उपायों की निगरानी करने और सफाई कर्मचारियों की सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति में सुधार करने के लिए कानूनी एवं प्रशासनिक सुधारों के लिए कार्यवाही शुरू करेगा और सफाई कर्मचारियों के अधिकारों और सुरक्षा उपायों के अभाव के संंबध में प्राप्त विशेष श्किायतों की जांच करेगा। आयोग सफाई कर्मचारियों से संबंधित समस्याओं के अध्ययन एवं अनुसंधान का संचालन करेगा और इस संबंध में उचित कार्यवाही के लिए सरकार को रिपोर्ट करेगा। व्यक्ति या सफाई कर्मचारियों के समूह द्वारा, आयोग के विचार में, तथ्यों और सबूतों के आधार पर उसके समक्ष लाए गए किसी भी लंबित न्यायिक या अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया में अन्याय या भेदभाव या हस्तक्षेप का सामना करने वाले मामलों में आयोग जनहित याचिका शुरू करेगा और साथ ही उचित मामलों में कानूनी सहायता व पुनर्वास प्रदान करेगा।
आयोग जन जागरूकता उत्पन्न करने के लिए सफाई कर्मचारियों की समस्याओं पर विचार-विमर्श एवं चर्चा करने के लिए संगोष्ठियाँ आयोजित करेगा। आयोग हर वर्ष और ऐसे किसी भी समय जब वह उचित समझे, सरकार को पूर्ववर्ती धाराओं में निर्दिष्टï सुरक्षा उपायों बारे किए गए कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा और सफाई कर्मचारियों को प्रभावित करने वाले कानूनों के मौजूद प्रावधानों की समीक्षा करने और किसी भी कमी या कमियों को दूर करने के लिए विधायी उपाय करने बारे सिफारिश करेगा। इसके अतिरिक्त, आयोग सफाई कर्मचारियों के संरक्षण, कल्याण, सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए उपाय सुझाएगा और ऐसे अन्य मामलों, जिन्हें सफाई कर्मचारियों के कल्याण के लिए आयोग द्वारा अनावश्यक या उचित माना जाएगा या जिन्हें सरकार द्वारा संदर्भित किया जा सकता है, के बारे में सुझाव देगा।
आयोग मेहतरों और सफाई कर्मचारियों के कल्याण के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से प्रायोजित कार्यक्रमों और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा या निगरानी भी करेगा। आयोग अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए, जहां तक संभव होगा, राज्य के गैर-सरकारी संगठनों विशेषकर, सफाई कर्मचारियों के संगठनों के अतिरिक्त सरकारी विभागों एवं एजेंसियों के परामर्श एवं सहयोग से कार्य करेगा। इस कार्य में गैर-सरकारी संगठनों को शामिल करने के लिए आयोग गैर-सरकारी संगठनों के परामर्श से ऐसे मानदंड एवं मानक तैयार एवं अधिसूचित कर सकता है, जिसके आधार पर वह राज्य में संगठनों की पहचान एवं सूचीबद्घ करेगा। आयोग को ऐसे सूचीबद्घ किए गए संगठनों की सूची तैयार करनी होगी और सरकार द्वारा मांगे जाने पर उसे उपलब्ध करवाना होगा। 

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हरियाणा सरकार ने शहीद रोहताश सिंह की विवाहित पुत्री श्रीमती जसवंती देवी को अनुकंपा आधार पर नौकरी देने का निर्णय लिया है

 
चंडीगढ़, 13 सितंबर- हरियाणा सरकार ने शहीद रोहताश सिंह की विवाहित पुत्री श्रीमती जसवंती देवी को अनुकंपा आधार पर नौकरी देने का निर्णय लिया है। 
इस आशय का निर्णय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया है।
नीति, जिसके तहत सशस्त्र या अर्धसैन्य बलों के हरियाणा अधिवासी शहीद के एक आश्रित को तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी में नौकरी प्रदान की जाती है, के मानदंडों में छूट देते हुए श्रीमती जसवंती देवी को अनुकंपा आधार पर लिपिक की नौकरी दी गई है।
शहीद रोहताश सिंह का निधन 14 मई, 1989 को ऑपरेशन पवन (श्रीलंका) के दौरान हुआ था। उस समय उनकी पुत्री 12 वर्ष की थी। अब उसने सरकार से नीति के अनुसार उसे नौकरी देने का आग्रह किया था। वह एम.ए., बी.एड है और लिपिक के पद पर नियुक्ति के लिए पात्र है।
वर्तमान राज्य सरकार ने अब तक सेना के 141 और अर्ध सैन्य बलों के 11 शहीदों के 152 आश्रितों को अनुकंपा आधार पर नौकरी दी है।
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मंत्रिमंडल की बैठक में जिला फरीदाबाद की उप-तहसील तिगांव के 11 गांवों को तहसील फरीदाबाद में शामिल करने के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के एक प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।

चंडीगढ़, 13 सितंबर- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में जिला फरीदाबाद की उप-तहसील तिगांव के 11 गांवों को तहसील फरीदाबाद में शामिल करने के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के एक प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।
इस आशय का निर्णय उपायुक्त फरीदाबाद के सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। इन गांवों को खेड़ी कलां, भटोला, खेड़ीखुर्द, बदरपुर सैद, ताजुपुर, भुपनी, भसकौला, महावतपुर, नचौली, मौजमाबाद और चाक मजई शामिल हैं।
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हरियाणा सरकार ने हरियाणा सदाचारी बंदी (अस्थाई रिहाई) नियम 2007 के उपनियम 4 (2) को हटाने का निर्णय लिया
 
चंडीगढ़, 13 सितंबर- हरियाणा सरकार ने हरियाणा सदाचारी बंदी (अस्थाई रिहाई) नियम 2007 के उपनियम 4 (2) को हटाने का निर्णय लिया है ताकि दोषी और 4 साल से कम की कैद के सजायाफ्ता कैदियों को पैरोल प्रदान की जा सके।
इस आशय का निर्णय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया है।
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मंत्रिमंडल की बैठक में जिला सिरसा में रानियां से कुतबुद्घ तक घग्गर नदी क्रासिंग लिंक मार्ग पर पुल के निर्माण के लिए भू-मालिकों से कलेक्टर रेट पर 2.84 एकड़ भूमि की खरीद करने के लोकनिर्माण (भवन एवं सडक़ें) विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की

चंडीगढ़, 13 सितंबर- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में जिला सिरसा में रानियां से कुतबुद्घ तक घग्गर नदी क्रासिंग लिंक मार्ग पर पुल के निर्माण के लिए भू-मालिकों से कलेक्टर रेट पर 2.84 एकड़ भूमि की खरीद करने के लोकनिर्माण (भवन एवं सडक़ें) विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई है।
यह भूमि वर्ष 2016-17 में लागू कलेक्टर रेट पर खरीदी जाएगी। रानियां में उपजाऊ भूमि का कलेक्टर रेट 17.5 लाख रुपये प्रति एकड़ और गैर-उपजाऊ भूमि का कलेक्टर रेट 10.4 लाख रुपये प्रति एकड़ है। गांव कुतबुद्घ की समस्त भूमि का कलेक्टर रेट 17 लाख रुपये प्रति एकड़ है।
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हरियाणा विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय अधिनियम 2016 में संशोधन करने के लिए एक अध्यादेश लाने के कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
इस अध्यादेश से पदों के सृजन और निदेशक, प्रधानाचार्य, शिक्षकों, गैर-शिक्षण स्टाफ तथा अन्य स्टाफ की नियुक्ति के लिए नियम एवं शर्तें निर्धारित करने की सुविधा होगी। इसके अतिरिक्त, ज्ञान संसाधन केंद्र, विश्वविद्यालय विस्तार बोर्ड, सूचना ब्यूरो, रोजगार ब्यूरो, स्वायत्त आकलन बोर्ड, जहां भी आवश्यक हो, की स्थापना, रख-रखाव एवं प्रबंधन की सुविधा भी होगी।
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मंत्रिमंडल की बैठक में उदय योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए जारी 3892.50 करोड़ रुपये और 2016-17 के लिए जारी इतनी ही राशि के सहायता अनुदान को स्टेट इक्विटी में बदलने की स्वीकृति प्रदान की
चंडीगढ़, 13 सितंबर- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में उदय योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए जारी 3892.50 करोड़ रुपये और 2016-17 के लिए जारी इतनी ही राशि के सहायता अनुदान को स्टेट इक्विटी में बदलने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
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हरियाणा सरकार ने राज्य में गुु्रप सी और डी के पदों पर भर्ती के मामले में चयन प्रक्रिया के दौरान साक्षात्कार लेने की प्रणाली को समाप्त करने का निर्णय लिया

चंडीगढ़, 13 सितंबर - हरियाणा सरकार ने राज्य में गुु्रप सी और डी के पदों पर भर्ती के मामले में चयन प्रक्रिया के दौरान साक्षात्कार लेने की प्रणाली को समाप्त करने का निर्णय लिया है। 
इस आशय का निर्णय मुख्यमंत्री, मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की एक बैठक में लिया गया।
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 हरियाणा सरकार ने हरियाणा विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय अधिनियम 2016 में संशोधन करने के लिए एक अध्यादेश लाने के कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की
चंडीगढ़, 13 सितंबर- हरियाणा सरकार ने हरियाणा विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय अधिनियम 2016 में संशोधन करने के लिए एक अध्यादेश लाने के कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
यह निर्णय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।
अध्यादेश लाना इसलिए आवश्यक हो गया है क्योंकि इस समय राज्य विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा और अभी इसके बुलाए जाने की संभावना भी नहीं है। यह अध्यादेश हरियाणा विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश 2017 कहलाएगा।
इस अध्यादेश से पदों के सृजन और निदेशक, प्रधानाचार्य, शिक्षकों, गैर-शिक्षण स्टाफ तथा अन्य स्टाफ की नियुक्ति के लिए नियम एवं शर्तें निर्धारित करने की सुविधा होगी। इसके अतिरिक्त, ज्ञान संसाधन केंद्र, विश्वविद्यालय विस्तार बोर्ड, सूचना ब्यूरो, रोजगार ब्यूरो, स्वायत्त आकलन बोर्ड, जहां भी आवश्यक हो, की स्थापना, रख-रखाव एवं प्रबंधन की सुविधा भी होगी।