हमारा सौभाग्य कि हम शहीदों की कुर्बानियों से आज़ाद देश में सांस ले रहे हैं : प्रो अवनीश वर्मा -कमलेश भारतीय

हिसार, 24.11.21- : यह हमारे सबसे बड़ा सौभाग्य है कि हम शहीदों की कुर्बानियों से आज़ाद देश में सांस ले रहे हैं । यह कहना है गुरु जम्भेश्वर विश्विद्यालय के कुलसचिव प्रो अवनीश वर्मा का । वे युवा कल्याण निदेशालय की ओर से अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में शुरु हुई व्याख्यान श्रृंखला को मुख्यातिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे । उन्होंने कहा कि लम्बे संघर्ष के बाद यह आज़ादी हमें मिली और इसका भारी मूल्य शहीदों ने चुकाया । छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो दीपा मंगला ने प्रारम्भ में मुख्यातिथि का जहां स्वागत् किया और मुख्य वक्ता डाॅ महेंद्र विवेक का विस्तृत परिचय भी दिया । रश्मि और निमिषा सूर्यांशी ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया ।
मुख्य वक्ता व डी एन काॅलेज के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डाॅ महेंद्र विवेक ने व्याख्यान श्रृंखला की शुरूआत करते जहां सन् 1857 की क्रांति की बात की , वहीं विस्तारपूर्वक हरियाणा के आज़ादी के संघर्ष के योगदान का उल्लेख किया । उन्होंने कहा कि हमने पचहतर वर्ष पूरे कर लिये ये माइलस्टोन के समान हैं और हमें आगे कैसे बढ़ना है , यह भी सोचना है । इसलिए स्वतंत्रता का अर्थ न भूलें । हरियाणा के योगदान की चर्चा करते कहा कि अंग्रेजों ने इसके सात जिलों में कितने कितने अत्याचार , जुल्म व प्रताड़नाएं कीं कि रोंगटे खड़े हो जाते हैं और धन्य हैं वे शहीद जिन्होंने ये जुल्म हंसते हंसते सहे और कुर्बानियां दीं । सबसे ज्यादा थानेसर में 28 बार लोगों को रोडरोलर से कुचला गया । हांसी और हिसार में भी ऐसे कुकृत्य किये गये । राव तुलाराम सहित कुछ व्यक्तियों के संघर्ष व योगदान का विशेष उल्लेख भी किया । मेवात के तो गांव के गांव को आग लगा दी जाती थी । रोहनात गांव की चर्चा भी की ।
डाॅ विवेक ने बताया कि 27 हरियाणवी रागनियां भी स्वतंत्रता आंदोलन पर मिलती हैं । उन्होंने कुछ अंश भी सुनाये :
के के जुल्म करे गोरेयां ने
आज़ादी की कीमत
चुकाई बड़ी भारी ,,,
हरियाणा ने कदम से कदम मिलाकर आज़ादी की लड़ाई में योगदान दिया । युवा कल्याण निदेशालय के निदेशक अजीत सिंह ने मुख्यातिथि प्रो अवनीश वर्मा और मुख्य वक्ता डाॅ महेंद्र विवेक का हार्दिक आभार करते बताया कि यह श्रृंखला चार भागों में चलेगी और आज के कार्यक्रम से निश्चित ही आज़ादी के संघर्ष में हरियाणा के योगदान से परिचित हुए होंगे और उनकी जिज्ञासा भी बढ़ी होगी ।

पूर्व उपाध्यक्ष हरियाणा ग्रंथ अकादमी

9416047075

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तिवारी की किताब से कांग्रेस में विवाद
-कमलेश भारतीय
HISAR,24.11.21-किताबें लिखी जाती हैं और इन पर विवाद भी होते हैं । सबसे बड़ा विवाद सलमान रश्दी की किताब'सेटेनिक वर्सिज' पर हुआ था और उनको मारने का फतबा तक जारी हो गया था । वैसा ज़ोरदार विवाद फिर तस्लीमा नसरीन की किताब 'लज्जा' को लेकर हुआ और उसे अपना वतन छोड़ कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी । इससे कुछ दिन पहले तक कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की किताब पर भी विवाद छिड़ गया था । अब नया विवाद कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी की किताब पर शुरू हुआ है । मनीष तिवारी की किताब है -'टन फ्लैश प्वाइंट्स : ट्वंटी ईयर्स' ।
पुस्तक में सबसे ज्यादा विवाद 26/11 के मुम्बई के ताज होटल पर पाकिस्तान के आतंकवादियों के हमले को लेकर है । मनीष तिवारी तब मनमोहन सरकार मे मंत्री भी थे और उनका मानना है कि इस आतंकवादी हमले के बाद भारत को कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए थी । कई बार संयम कमज़ोरी की निशानी होती है । संयम ताकत की पहचान नहीं है । ऐसे मौकों पर शब्दों से ज्यादा कार्यवाई दिखनी चाहिए । यह ऐसा ही मौका था ।
इस पर जाहिर है कि भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया आती और आई कि निकम्मी थी सरकार जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रखा । भारत की अखंडता और सुरक्षा की कांग्रेस सरकार को कोई चिंता नहीं थी । इस पर मनीष तिवारी का कहना है कि 304 पृष्ठ की किताब में एक उद्धरण पर भाजपा की प्रतिक्रिया पर मुझे हंसी आती है । भाजपा अपने समय में भी राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिति से निपटने के लिए कड़े विश्लेषण पर भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दे । वैसे अगर मनीष को कोई एतराज था तो तब जाहिर करना चाहिए था । अब लकीर पीटने का क्या फायदा ?
दूसरी ओर कांग्रेस ने कहा कि किताब आने दीजिए और हम इसे पढ़ेंगे फिर देखते हैं कि चर्चा करनी है भी या नहीं । आम लोग आज महंगाई के कारण संघर्ष कर रहे हैं । हमारा धर्म है कि हम इन लोगों की आवाज़ उठायें ।
वैसे आजकल मनीष तिवारी कांग्रेस के विद्रोही 'जी 23' समूह में शामिल हैं । इसीलिए सलमान खुर्शीद ने कहा कि अनुशासन समिति इस पर विचार कर सकती है और कुछ कांग्रेस नेता भाजपा के स्वीपर सेल की तरह काम कर रहे हैं । इस किताब की टाइमिंग अनुशासनहीनता के करीब है ।
जो भी हो मनीष तिवारी ने लुधियाना से निश्चित हार देखते हुए एक समय लोकसभा चुनाव न लड़ने की असमर्थता जाहिर की थी और अस्पताल जाकर दाखिल हो गये थे । जब पार्टी का कठिन समय था तब वे चुनाव लड़ने से भाग खड़े हुए और अगली बार जब जीत निश्चित थी तो टिकट नहीं दिया गया । इसलिए इनका ' जी 23 ' में जाना तय हो गया। खैर । आगे आगे देखिए होता है क्या? कहीं तृण मूल कांग्रेस के द्वार पर दस्तक न दे दें जैसे अशोक तंवर कीर्ति आजाद ने दस्तक दी , द्वार खोला ममता बनर्जी ने और शामिल कर लिया ।
-पूर्व उपाध्यक्ष हरियाणा ग्रंथ अकादमी ।
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