चण्डीगढ़ 11 अक्तूबर - हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि प्रदेश में गाय के दूध से बने उत्पादों व पंचगव्य उत्पादों को बढ़ावा देना मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक सिद्ध होगा। इससे गौ संरक्षण को भी बल मिलेगा। उन्होंने यह बात बात सोमवार को उनसे मिलने आए हरियाणा गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री विद्या सागर बाघला से कही।

उन्होंने कहा कि गौ सेवा आयोग के पदाधिकारी पशुपालन विभाग, गौशालाओं व अन्य सामाजिक संस्थाओं से समन्वय स्थापित कर आमजन को पंचगव्य उत्पादों के प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध करवाएं तथा इन उत्पादों की मार्केटिंग में भी सहयोग करें। इससे यह उत्पाद लोकल से ग्लोबल तक पहुंच पाएंगे और यह आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

उन्होंने कहा कि गौ उत्पाद का अधिक से अधिक प्रयोग करने से गंभीर बीमारियों से बच सकता है। गौ उत्पाद बढ़ाने के लिए गाय का संरक्षण अति महत्वपणर््ूा है।

उन्होंने हरियाणा में गौ सेवा आयोग के गठन के लिए हरियाणा सरकार की प्रशंसा की और कहा कि गौ सेवा आयोग के माध्यम से प्रदेश में गौ संरक्षण के कार्यक्रम चलाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया है कि गाय का दूध, घी व इनसे बने उत्पाद मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए उत्तम हैं।

श्री दत्तात्रेय ने कहा कि कृषि में गाय के गोबर से बने अधिक से अधिक जैविक खादों का प्रयोग करके जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे किसानों की आय में भी हिजाफ़ा होगा और खेती एक लाभप्रद व्यवसाय बनेगा।

गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री विद्या सागर बाघला ने बताया कि हरियाणा की विभिन्न गौशालाओं में पांच लाख गायों को संरक्षित किया गया है। जिनमें से दूध देने वाली गायों को छोड़कर शेष सभी गायों को 300 से 500 रूपये की राशि चारे के रूप में दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि गाय के गोबर से बनने वाली जैविक खाद व अन्य उत्पाद तैयार करने के लिए पिंजौर में हरियाणा गौवंश अनुसंधान केन्द्र स्थापित किया गया है। इसके लिए आई.आई.टी रूड़की के तकनीकी सहयोग से जैविक खाद बनाने में अनुसंधान हो रहा है। यह जैविक खाद डी.ए.पी. खाद का विकल्प होगी और किसानों को सस्ती दर उपलब्ध होगी। इस जैविक खाद के प्रयोग से जहां भूमि की उर्वरकता शक्ति बढ़ेगी वहीं फसल उत्पादन में भी वृद्धि होगी।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में विभिन्न गौशालाओं में गाय के दूध, घी व गौमूत्र उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। जिनमें गौनायल व अन्य सामग्री सम्मिलित है। इन उत्पादों के लिए गौशालाओं में 2000 युवाओं को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।