CHANDIGARH,14.09.21 हम राजभाषा के संवर्द्धन के प्रति सदैव ऊर्जावाम और निरंतर प्रयासरत रहेंगे। जय राजभाषा ! जय हिंद !, दिलवाई।

इसी अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. जगत राम के संदेश को जारी किया गया। निदेशक महोदय के संदेश में उल्लेख किया गया है कि राजभाषा हिन्दी देश के लोगों को एक सूत्र में बांधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। चिकित्सा संस्थान में कार्य करने के नाते हमारी हिन्दी में काम क़रने के प्रति जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि हमारा सीधा सम्पर्क आम लोगों, जो इल्लाज करवाने के लिए हमारे संस्थान में आते हैं तथा रोग से भयभीत होते हैं, के साथ होता है। यदि हम उनसे हिन्दी में बात कर उन्हें उनके रोग के बारे में समझाते हैं, तो उनका तनाव काफी हद तक कम हो जाता है। यही नहीं, संस्थान का कामकाज जितना हम हिन्दी में करेंगे, उतनी ही हमारी परेशानी कम होगी और जनता एवं प्रशासन के बीच की दूरी उतनी ही घटेगी। यह हम सब का संवैधानिक दायित्व व जिम्मेदारी है कि हम सभी राजभाषा अधिनियमों, नियमों तथा इनके संबंध में समय-समय पर लिए गए निर्णयों का समुचित रूप से अनुपालन सुनिश्चित करें। हमारे संस्थान में कार्यरत अधिकांशत: कार्मिक हिंदी का अपेक्षित ज्ञान अथवा हिन्दी टाइपिंग की जानकारी रखते हैं तथा उनको हिल्दी में कार्य करले के लिए शब्दकोश, तकनीकी शब्दावलियां एवं कार्यालय दीपिका पुस्तक वितरित की हुई हैं। संस्थान के सभी कंप्यूटरों में हिन्दी टाइपिंग की सुविधा के लिए हिन्दी फोण्ट उपलब्ध है, उन्हें संस्थान की वैबसाइट से यूनिकोड फोण्ट डाउनलोड कर कंप्यूटरों में अपलोड करने की भी सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। उन्होंने आज के गौरवपूर्ण अवसर पर संस्थान के सभी डॉक्टरों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों से शाजभाषा हिन्दी के विकास और समृद्धि को राष्ट्रीय जिम्मेदारी समझते हुए अपील की कि वे दैनिक कामकाज और व्यवहार में अधिक से अधिक हिन्दी का प्रयोग करते हुए सरकार की राजभाषा नीति का कार्यान्‍्ययन कारगर बनाने में अपना सहयोग एवं योगदान दें। उनके संदेश में यह भी उल्लेख किया है कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा प्रयुक्त स्मृति विज्ञान से प्रेरित “॥2 प्र” अर्थात्‌ प्रेरणा, प्रोत्साहन, प्रेम, प्राइज़ अर्थात्‌ पुरस्कार, प्रशिक्षण, प्रयोग, प्रचार, प्रसार, प्रबंधन, प्रमोशन (पदोन्नति), प्रतिबद्धता, प्रयास के आधार पर संस्थान में हिंदी को लागू किए जाने का प्रयास किया जा रहा है, किन्तु राजभाषा संबंधी आदेशों का अनुपालन इढ़तापूर्वक किया जाना चाहिए। राजभाषा नीति कार्यान्वयन में यदि कुछ कठिनाइयां सामने आती हैं, तो उनका समाधान संयम और आपसी सहयोग से किया जाए।

प्रो. संजय भदादा, नोडल अधिकारी (राजभाषा) ने अपने उद्बोधन में “हम सभी यह तो कर ही सकते हैं” के अन्तर्गत ।. हम अपने हस्ताक्षर हिन्दी में कर सकते हैं। 2. हिन्दी में पता लिखें। हमारे व्यक्तिगत पत्र भारत के एक प्रांत से दूसरे प्रांत में पहुंच जाते हैं तो हम अपने कार्यात्रय के पत्रों प्र भी हिन्दी में पता लिख सकते हैं। ३. जब हम कार्यालय में बातचीत हिन्दी में कर सकते हैं तो अपने कार्यालय का काम भी हिन्दी में कर सकते हैं। 4. ज़ब फार्मों, लेखन सामग्रियों और रबड़ की मुहरों का व्यय हमारा कार्यालय वहन करता है तथा इनका द्विभाषी रूप में प्रयोग करना कानूनी अनिवार्यता भी है, तो इन्हें द्विभाषी रूप में ही तैयार करवाएं। 5. हमें हिन्दी में प्राप्त पत्रों के उत्तर हिन्दी में ही देने हैं। 6. हिल्‍्दी भाषी राज्यों की सरकारें अपना सारा राजकीय कार्य हिन्दी में करती हैं, हमें भी उनके साथ पत्र व्यवहार हिन्दी में ही करना चाहिए। 7. राजभाषा अधिनियम 963 की धारा 3(3) को लागू करना आवश्यक है तथा इसमें किसी भी प्रकार की छूट नहीं है। इसे पूरी तरह से लागू करें। 8. राजभाषा में अपना काम एवं व्यवहार कर राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता को सबल बताएं। 9. संसार में कोई भी ऐसा स्वतंत्र देश नहीं है जो अपना सरकारी कामकाज अपनी भाषा में न करता हो तो भारत ही उसका अपवाद क्यों? करने के लिए आग्रह किया।

इसी अवसर प्र संस्थान की शोध छात्राओं डॉ दविंदर कौर द्वारा लिखित पुस्तक “संतानहीनन दम्पत्तिथों के लिए सामान्य जानकारी पुस्तिका”, डॉ जानवी गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक “अंडादानी कैंसर संबंधी सामान्य जानकारी पुस्तिका” तथा संस्थान में कार्यरत श्री अभिजीत सिंह द्वारा लिखित पुस्तक “गर्भावस्‍था की सामान्य तकलीफों का समाधान-एक सचित्र पुस्तिका” एवं इसी विषय प्र तैयार की गई डीवीडी का प्रो. जी. डी. पुरी, संकायाध्यक्ष (शैक्षणिक) द्वारा विमोचन किया गया।

श्री रजनीश आनंद, प्रभारी अधिकारी (राजभाषा) ने कहा कि संस्थान में 4 सितम्बर से 28 सितम्बर, 202 तक हिंदी पखवाड़े का आयोजन किया जा रहा है। जिस दौरान संस्थान में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्‍न हिंदी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने इन प्रतियोगिताओं में स्वयं भाग लेने और संस्थान में कार्य करने वाले सभी कार्मिकों को इनमें भाग लेने के लिए अनुरोध किया। उन्होंने उपस्थित सभी सदस्यों एवं कार्मिकों का धन्यवाद भी किया।a