करनाल,24.02.21- माता-पिता व वरिष्ठ नागरिक मेंटेनेंस और कल्याण अधिनियम 2007 के प्रावधानों के तहत अपने बच्चों या कानूनी उत्तराधिकारियों द्वारा उपेक्षित वरिष्ठ नागरिक और माता-पिता उनसे रखरखाव का दावा कर सकते हैं। हरियाणा सरकार ने इस केंद्रीय अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए उप प्रभागीय स्तर पर मेंटेनेंस न्यायाधिकरणों की स्थापना की है। । हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष और ग्रामोदय न्यास के संस्थापक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय द्वारा जन जागरण कार्यक्रमों की अपनी 'वेक अप करनाल' श्रृंखला के एक सत्र के रूप में आयोजित चर्चा में यह बात कही। करनाल मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल, करनाल के सदस्य एडवोकेट अमित मुंजाल और मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल, असंध के पूर्व सदस्य डॉ. बूटी राम ने भी चर्चा में भाग लिया।

डॉ. चौहान ने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों को उचित सुरक्षा प्रदान करने के लिए 2007 अधिनियम के तहत मौजूदा कानूनी प्रावधानों को अपर्याप्त पाया गया है। इसके मद्देनजर, संसद में 2019 में एक विधेयक पेश किया गया था जिसमें उक्त अधिनियम में संशोधन की मांग की गई थी। तब वर्तमान विधेयक को इसकी समीक्षा और सिफारिशों के लिए संसदीय स्थायी समिति के पास भेजा गया था।

अधिवक्ता अमित मुंजाल ने इस अवसर पर कहा कि उप-मंडल मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल करनाल में हर सोमवार को अपनी कार्यवाही करता है और वरिष्ठ नागरिकों के साथ उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के मामलों का नियमित रूप से निपटारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि अधिनियम के तहत संबंधित उपायुक्तों के अधीन जिला स्तरीय न्यायाधिकरण, उप मंडलीय मेंटेनेंस न्यायाधिकरणों पर अपीलीय प्राधिकार का प्रयोग करते हैं।

असंध के लिए मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के सदस्य के रूप में अपने अनुभव को साझा करते हुए डॉ. बूटी राम ने कहा कि ट्रिब्यूनल में इसके सदस्य के रूप में नियुक्त होने पर जब वह पहली बार तत्कालीन एसडीएम से मिले, तो अधिकारी ने स्वीकार किया कि वे खुद मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के अस्तित्व और पीठासीन अधिकारी के रूप में प्राप्त शक्तियों से अनजान थे।

डॉ. बूटी राम और अमित मुंजाल दोनों ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक अपने बच्चों द्वारा उपेक्षित और आहत होने के बावजूद भी अपने दर्द और शिकायतों की रिपोर्ट करने के लिए अधिकारियों के समक्ष बहुत ही कम आते हैं। दोनों की सहमति थी कि प्रस्तावित अधिनियम में सख्त प्रावधान और भविष्य में उनकी प्रभावी क्रियान्विति सुनिश्चित की जानी चाहिए।