नई दिल्ली,21.02.21-: संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास विश्व महापीठ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं चंडीगढ़ प्रदेश के प्रभारी कुलदीप मेहरा ने जानकारी दी कि आज संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास विश्व महापीठ के चौथे राष्ट्रीय अधिवेशन को महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी ने संबोधित किया। यह अधिवेशन नई दिल्ली के विज्ञान भवन में किया गया। इस अधिवेशन में मुख्यातिथि महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी, विशिष्ट अतिथि महामहिम राज्यपाल हरियाणा श्री सत्यदेव नारायण आर्य जी एवं महामहिम राज्यपाल उत्तराखंड श्रीमती बेबी रानी मौर्या जी रहें।
इस अधिवेशन में महामहिम राष्ट्रपति ने संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास विश्व महापीठ के अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री दुष्यंत कुमार गौतम जी को श्री गुरु रविदास रत्न आवार्ड देकर सम्मानित किया।
अधिवेशन को संबोधित करते हुऐ कोविंद जी ने कहा कि संत श्री गुरू रविदास जी ने समता-मूलक और भेदभाव-मुक्त समाज की सुखमय समाज की संकल्पना को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसे समाज एवं राष्ट्र के निर्माण के लिये संकल्पबद्ध होकर काम करना हम सभी का कर्तव्य है जहां समाज में समता रहे और लोगों की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी होती रहें। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी जैसे संतों का आगमन सदियों में होता है गुरु जी चाहते थे कि सबका पेट भरे, कोई भूखा न रहे, सबका भला हो। उन्होंने कहा कि अच्छा इंसान वह है जो संवेदनशील है, समाज की मानवोचित मर्यादाओं का सम्मान तथा कायदे-कानून और संविधान का पालन करता है।
आगे महामहिम जी ने कहा कि हमारे संविधान के प्रमुख शिल्पी बाबा साहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने संत रविदास की संत-वाणी में व्यक्त अनेक आदर्शों को संवैधानिक स्वरूप प्रदान किया है। वहीँ संत रविदास ने अपनी करुणा और प्रेम की परिधि से समाज के किसी भी व्यक्ति या वर्ग को बाहर नहीं रखा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे संत शिरोमणि रविदास को किसी विशेष समुदाय तक बांध कर रखा जाता है तो मेरे विचार से, ऐसा करना, उनकी सर्व-समावेशी उदारता के अनुसार नहीं है। संत की न कोई जाति होती है, न संप्रदाय और न ही कोई क्षेत्र बल्कि पूरी मानवता का कल्याण ही उनका कार्य क्षेत्र होता है। इसीलिए संत का आचरण सभी प्रकार के भेद-भाव तथा संकीर्णताओं से परे होता है। कार्यक्रम की सफलता के लिए राष्ट्रपति जी ने संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास विश्व महापीठ के सभी पदधिकारियों को बधाई दी।
महापीठ के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद रविदास रत्न श्री दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने संबोधन में कहा कि जिस भगवान ने इस हाड़ मांस के इंसान को बनाया है। वह च-चमडीं, मा-मांस, र-रक्त इस प्रकार चमार का अर्थ हुआ सारा मानव जगत ही चमार है। उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति जी का विश्व महापीठ के अधिवेशन में पहुंचने पर अभिनंदन किया।