चण्डीगढ़, 21 फरवरी- महापुरूषों के जीवन दर्शन, चिंतन, वाणी एवं शिक्षाओं से समाज में निरंतर सामाजिक परिवर्तन की लहर प्रदर्शित हुई है। श्री गुरू रविदास जी ने भक्तिकाल में जो समरसता का चिंतन दिया था, उसे देश की सरकार आज भी आगे बढ़ा रही है। यह उद्गार हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य ने रविवार को रविदास जयंती के उपलक्ष में विज्ञान भवन में आयोजित श्री गुरू रविदास जयंती महोत्सव-2021 के कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए व्यक्त किए।

इस कार्यक्रम में भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
राज्यपाल श्री आर्य ने कहा कि महापीठ के अधिवेशन व श्री गुरू रविदास जयंती महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी ने गुरू रविदास की वाणी एवं शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार को गति देने का कार्य किया है, इससे देश में गुरू जी के सभी अनुयायियों का उत्साहवर्धन हुआ है। साथ ही साथ श्री गुरू रविदास विश्व महापीठ के सभी पदाधिकारियों एवं गरीब समाज के लोगों का हौंसला भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रपति जी के विशेष आभारी रहेगें।इस अवसर पर उतराखंड की राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य, राज्य सभा सांसद व महापीठ के अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री दुष्यंत कुमार गौतम, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन श्री विजय सांपला, केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल, श्री सोमप्रकाश, श्री रतनलाल कटारिया, श्री गुरु रविदास विश्व महापीठ के अध्यक्ष श्री सुरेश राठौर, हिमाचल के मंत्री श्री राजीव शहजल, राष्ट्रीय प्रधान महामंत्री श्री सूरजभान कटारिया सहित महापीठ के अन्य पदाधिकारी,सदस्यगण गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
श्री आर्य ने इस कार्यक्रम में श्री गुरु रविदास स्मारिका-2021 का भी विमोचन किया।
श्री आर्य ने कहा कि केन्द्र सरकार ने देश में सामाजिक समरसता के चिंतन को आगे बढ़ाते हुए ‘‘सबका साथ-सबका विकास तथा सबका विश्वास’’ के सिद्धान्त पर कार्य किया है, जिससे देश में सामाजिक सद्भाव मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि जब-जब देश में ऊंॅच-नीच, भेदभाव, जाति-पाति, धर्मभेद हुआ है, तब-तब अनेक महापुरूषों ने इस धरती पर जन्म लेकर समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के लिए भूली भटकी मानवता को जीवन का सच्चा रास्ता दिखाया है। ऐसे महापुरूषों में संत शिरोमणि गुरू रविदास जी का नाम बड़े आदर से लिया जाता है।
श्री आर्य ने कहा कि गुरू रविदास जी ऐसे समाज की शासन व्यवस्था चाहते थे, जहां सबको भोजन मिले, कोई भी भूखा न सोये और छोटे बड़े की कोई भावना न रहे। सभी मनुष्य समान हों। श्री गुरू रविदास जी महाराज आज अपने चिंतन-दर्शन और शिक्षाओं के कारण पूरे विश्व में प्रचारित हैं। गुरू जी कहते थे कि मनुष्य जन्म से छोटा-बड़ा नहीं होता बल्कि कर्मों से ही छोटा-बड़ा होता है।
उन्होंने कहा कि श्री गुरू रविदास जी के साथ ही गुरू नानक देव जी, महात्मा बुद्ध जी, संत कबीरदास जी और बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर जी का दर्शन समाज में एक नई सांस्कृतिक परिवर्तन की लहर प्रदर्शित कर रहा है। कोई भी इन्सान ऊँचा उठना चाहे तो वह संघर्ष, कड़ी मेहनत, ईमानदारी, समाज सेवा और प्रभु-भक्ति से ही ऊँचा उठ सकता है और वह महान बन सकता है। बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर जी संघर्ष के एक जीते जागते देवता हैं। इन महापुरूषों ने स्वंय संघर्ष का मार्ग अपनाकर देश के गरीब व दबे हुए लोगांें के लिए प्रगति व उत्थान का मार्ग प्रसस्त किया है।
श्री आर्य ने कहा कि संघर्ष और बहादुरी के कार्यों से रविदासिया समाज का इतिहास भरा पड़ा है। श्री गुरू रविदास जी महाराज और बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पे्ररणादायी उद्देश्यों से समाज ने देश की स्वतंत्रता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिस पर हम सब गर्व करते हैं।
राज्यपाल श्री आर्य ने कहा कि गुरू रविदास जी की वाणी आज भी प्रासंगिक है। सन्त शिरोमणी गुरू रविदास विश्व महापीठ श्री गुरू रविदास जी के सन्देश को जन-जन तक पहुंचाने का महान कार्य कर रही है। विश्व महापीठ के कार्यों से गरीब समाज को एक नया रास्ता मिल रहा है।