धर्मशाला, 22 जनवरी: मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में आज राष्ट्रीय युवा अभियान के अंतर्गत कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अभियान का शुभारम्भ मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गुरूदर्शन गुप्ता के द्वारा किया गया।

मुख्य अतिथि डॉ. गुरूदर्शन गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि हम सभी को अपना एचआईवी का स्टेट्स पता होना चाहिए, एचआईवी के बारे में हम सब खुल कर बात करें और एचआईवी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूकता फैलायें। उन्होंने बताया कि 90 प्रतिशत जनसँख्या को अपना एचआईवी स्टेट्स का पता होना चाहिए, 90 प्रतिशत एचआईवी से ग्रसित लोग एआरटी (दवाईयां) प्राप्त करें, तथा 90 प्रतिशत वायरल लोड कम करना हमारा लक्ष्य है। कार्यशाला के अंत में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गुरदर्शन गुप्ता ने सभी से आहवान किया कि किसी भी आपदा से लड़ने के लिये स्वास्थ्य विभाग ही पर्याप्त नही है उसके लिए जनता का सहयोग जरूरी है।

इस दौरान आईसीटीसी काउंसलर प्रीत किरण ने स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर शुरू हुये युवा दिवस के आयोजन के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुये बताया कि 12 जनवरी, 1863 को स्वामी विवेकानंद जी का जन्म हुआ था। इस दिन को देश युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उदेश्य युवा पीढ़ी को यह बताना है कि जिस तरह स्वामी विवेकानंद जी ने अपने जीवन में सफलता हासिल की ठीक उसी तरह उनके विचारों को अपनाकर युवा पीढ़ी भी सफलता हासिल करे।

इस अवसर पर जिला एड्स परियोजना अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने जानकारी देते हुूये बताया कि एड्स फैलने के मुख्य चार कारण जैसे असुरक्षित यौन सम्बन्ध, एचआईवी संक्रमित खून स्वस्थ व्यक्ति में चढ़ाने से, संक्रमित मां से उसके बच्चे में तथा बिना उबली हुई सुई का प्रयोग करने से होता है। उन्होंने बताया कि एड्स साथ रहने से, साथ खाना खाने से, हाथ मिलाने से तथा मच्छर के काटने से नही होता है। डॉ. सूद ने बताया कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति तथा उनके बच्चो को सरकार द्वारा प्रदान की जा रही वितीय सहायता जो कि 300 से 800 रुपये प्रति माह है, उम्र के हिसाब से बच्चों को आईसीटीसी के द्वारा प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति को 1500 रुपये प्रति माह सरकार द्वारा दिया जाता है।

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विक्रम कटोच नेे इस अवसर परएचआईवी एड्स प्रभावित गर्भवती महिला की सुरक्षित प्रसव के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने डिलिवरी के बाद बच्चे की देखभाल के बारे में पूरी जानकारी प्रदान करते हुये बताया कि एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिला अपने होने वाले बच्चे को अपना दूध पिला सकती है ताकि बच्चे को दूसरे संक्रमण से बचाया जा सके। महिला को अपने बच्चे को सिर्फ अपना दूध पिलाना है उसे छः महीने से पहले माँ के दूध के अलावा कुछ नही देना है, इसके अलावा उन्होंने बताया कि चूँकि एचआईवी एड्स के अतिरिक्त कई ऐसे संक्रमण जैसे हेपेटाइटिस बी, सी ज्यादा खतरनाक संक्रमण हैं परन्तु एचआईवी वायरस की म्युटेशन बहुत जल्दी होती है इसलिए हमे ज्यादा सतर्क रहना पड़ता है।

कार्यशाला में जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आदित्य सूद, डॉ. अनुराधा, डॉ. प्रिया तथा जन शिक्षा एव सम्प्रेषण अधिकारी छांगा राम ठाकुर, स्वास्थ्य शिक्षक उर्मिला देवी, यौन रोग काउंसलर मनोज कुमार तथा लैब तकनीशियन अन्तरिक्ष डोगरा ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।