हिसार,17.01.21- - हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष व अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव बजरंग गर्ग ने अनेकों टोल प्लाजा पर किसानों से मिलने के उपरांत चौधरीवास टोल प्लाजा पर किसानों से बातचीत करते हुऐ कहा कि किसान और व्यापारी एक गाड़ी के दो पहीए हैं और किसान व्यापारी का चोली दामन का साथ है और हमेशा रहेगा मगर बड़े अफसोस से कहना पड़ रहा है कि केंद्र सरकार जबरन तीन कृषि कानून को लागू करके किसान व आढ़तीयों को बर्बाद करने पर तुली हुई है। कृषि कानून से देश के किसान, आढ़ती ही नहीं आम जनता को भारी नुकसान होगा। देश के इतिहास में पहला इतना बड़ा आंदोलन है किसान के साथ देश व प्रदेश का हर नागरिक जुड़ा हुआ है। किसान देश का अन्नदाता है। किसानों को अपनी जमीन व खेती बचाने के लिए 52 दिनों से कड़ाके की ठंड में आंदोलन करना पड़ रहा है। आंदोलन में भारी ठंड के कारण लगभग 68 किसान अपनी जान की कुर्बानी दे चुके हैं मगर गूंगी बहरी सरकार तीन कृषि कानून को वापिस लेने की बजाए आंख मूंद कर तमाशा देख रही है।

प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने कहा कि केंद्र सरकार तारीख पर तारीख देकर किसान आंदोलन को कमजोर करने की नाकाम कोशिश करने में लगी हुई है। जब देश व प्रदेश का किसान व आढ़ती नहीं चाहता तो केंद्र सरकार जबरन तीन काले कृषि कानून क्यों किसान व आढ़तीयों पर थोपना चाहती है इसे साफ सिद्ध होता है कि प्रधानमंत्री अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए तीन कृषि कानून की आड़ में किसान व आढ़तियों का नुकसान करना चाहती है। केंद्र सरकार ने कृषि कानून में स्टॉक सीमा समाप्त करके अडानी-अंबानी व बड़ी-बड़ी कंपनियों को अनाज की जमाखोरी करके जनता की जेबों में ड़ाका डालने का लाइसेंस देना चाहती है जबकि अनाज की जमाखोरी को पाप माना जाता है।

प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने कहा कि एक तरफ अडानी व अंबानी कहते है कि हम अनाज का व्यापार नहीं करेंगे हमारा तीन कृषि कानूनों से कोई मतलब नहीं है दूसरी तरफ हरियाणा, पंजाब, यूपी, मध्य प्रदेश, राजस्थान व अन्य राज्यों में सैकड़ों एकड़ जमीन में वेयरहाउस बनाकर बड़े-बड़े अनाज के भंडार अडानी व अंबानी ने बनाए है। इससे साबित होता है कि बड़ी बड़ी कंपनी सब्जियों की तरह अनाज भी औने-पौने दामों में खरीद कर उसका भंडार करके जनता से कई गुना मुनाफा खाकर जनता को लूटने का काम करेंगे।

प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने कहा कि सरकार ने जब सरकारी मंडियां बनाई हुई है तो देश व प्रदेश प्राइवेट मंडियां क्यों बनाने का कानून बनाया गया है। इससे साफ सिद्ध होता है कि सरकार सरकारी मंडियां बंद कर करवा कर किसान की फसल पर एमएसपी खत्म करना चाहती है और आढ़तियों का व्यापार बंद करवाना चाहती है। सबको पता है कि सरकारी मंडिया बंद होने से किसान की फसल एमएसपी रेटों पर कौन खरीदेगा। केंद्र सरकार को अपनी जिद छोड़कर किसान, आढ़ती व आम जनता के हित में तीन कृषि कानूनों को वापिस ले। केंद्र सरकार किसानों से बातचीत करके देश की आम जनता के हित में चौथा कानून बनाए ताकि देश की जनता महंगाई की मार से बच सकें।